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जानिठचिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ होता है
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ है ?
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ मचà¥à¤›à¤°à¥‹ के काटने से मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹ में फैलता है। जिससे उनके शरीर में बà¥à¤–ार à¤à¤µ जोड़ो में दरà¥à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो जाती है। यह संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ रोग कà¥à¤› दिनों के लिठरहता है। बहà¥à¤¤ कम मामलो में किसी दà¥à¤°à¥à¤²à¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की मृतà¥à¤¯à¥ चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ रोग से हो जाती है। चिकिसà¥à¤¤à¤• के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° इसके लकà¥à¤·à¤£ लंबे समय तक रहते है। और शरीर को कमजोर बनाते रहते है। अà¤à¥€ तक इसका टिका उपलबà¥à¤§ नहीं हà¥à¤† है। केवल दवाइयों के माधà¥à¤¯à¤® से चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का उपचार किया जाता है।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ होने के कारण
कà¥à¤¯à¤¾ है ?
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित कारणों से हो सकता है।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ के काटने से होता है। इन मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ में सबसे पà¥à¤°à¤¥à¤® à¤à¤¡à¥€à¤œ पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿ का मचà¥à¤›à¤° à¤à¤µ à¤à¤²à¤¬à¥‹à¤ªà¤¿à¤•टस मचà¥à¤›à¤° शामिल है।
यह मचà¥à¤›à¤° अधिक दिन के समय काटते है और अपना संकà¥à¤°à¤®à¤£ लोगो में फैलाते है।
इन मचà¥à¤›à¤°à¥‹ का संकà¥à¤°à¤®à¤£ मनà¥à¤·à¥à¤¯ से मनà¥à¤·à¥à¤¯ में सीधे नहीं फैलता है। बलà¥à¤•ि यह मचà¥à¤›à¤° संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को काटकर गैर संकà¥à¤°à¤®à¥€à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को काटता है। तो इसके कारण सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में à¤à¥€ संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का वायरस आ जाता है। सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ बीमार हो जाता है।
इसका संकà¥à¤°à¤®à¤£ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर में 8 से 10 दिन तक रह सकता है। किंतॠकà¥à¤› लोगो में यह बीमारी 3 से 4 दिन तक रहती है।
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